जीवन ! मरने के बाद इंसान के साथ क्या होता है जानें


मृत्यु के ठीक पहले और उसके तुरंत बाद आदमी के साथ क्या होता है, यह आज तक एक रहस्य ही है। विभिन्न धर्मों में इसकी अलग अलग तरह से व्याख्या की गई है। परन्तु इन धार्मिक तर्कों को न मानते हुए वैज्ञानिक इस सत्य को जानने में जुटे हुए हैं। हाल ही में वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन से खुलासा हुआ है कि मौत के समय कुछ इस तरह की चीजें होती हैं जिनकी कभी कल्पना भी नहीं की गई थी। आध्यात्म के अनुसार मृत्यु के समय व्यक्ति को अपने जीवन के सभी कर्म दिखाई देने लगते हैं। उसके जीवन में उसने अपने अंतिम क्षण आने तक क्या क्या किया है, उसे सब कुछ दिखाई देता है। उस समय वह अपने जीवन की हर छोटी से छोटी घटना देख लेता है।
कुछ आध्यात्म विज्ञानियों के अनुसार व्यक्ति अपने पहले से मर चुके निकट परिजनों, घनिष्ठ मित्रों को भी देखता है। माना जाता है कि पहले से मृत्यु के पार जा चुके ये लोग व्यक्ति को उसके अंतिम क्षणों में लेने आते हैं। कुछ लोग जो मर कर वापिस जिंदा हो गए वे बताते हैं कि मौत के बाद उन्हें लगा जैसे उनका शरीर बहुत हल्का हो गया और जमीन से ऊपर हवा में तैरने लगा। इसके बाद वे एक प्रकाश से भरी लंबी सुरंग में जाते हैं जहां से उन्हें वापिस भेज दिया जाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार जिनकी मृत्यु समय से पहले हो जाती है उन्हीं को ये अनुभव होते हैं, अन्य को नहीं।

कुछ लोगों को इस अनुभव में फरिश्तों के भी दर्शन हुए और कुछ को दिव्य आवाजें भी सुनाई दीं। इन अनुभवों को वैज्ञानिकों ने नियर डेथ एक्सपीरियंस कहा। आश्चर्यजनक रूप से ऎसे व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म के रहे हों, नास्तिक हो, नस्ल हो या फिर उनमें किसी भी तरह का भेदभाव रहा हो, सबके अनुभव एक ही थे। इससे सिद्ध होता है कि धर्म, जातियों, देश प्रथाओं के भेद पृथ्वी पर ही है, मृत्यु के बाद इनका कोई अस्तित्व नहीं है। वहां मनुष्य केवल आत्मा रूप में जाता है और वहां सभी कुछ समान है।

वैज्ञानिकों के अनुसार जब मस्तिष्क अपनी चेतना खो देता है तो ही व्यक्ति की मृत्यु होती है। मस्तिष्क हमारे शरीर के लिए किसी कम्प्यूटर के प्रोसेसर और ऑपरेटिंग सिस्टम की तरह काम करता है। इसमें मौजूद चेतना ज्योंही शरीर का साथ छोड़ती है, शरीर निर्जीव हो जाता है। हिंदू धर्म में इस चेतना को ही आत्मा कहा गया है। जो कभी नष्ट नहीं होती वरन एक रूप से दूसरे रूप में बदलती रहती है।

मृत्यु पर काम कर रहे वैज्ञानिकों के अनुसार मौत के समय हमारे शरीर में असामान्य गतिविधियां होने लगती हैं। दिमाग में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है जिससे नियर डेथ एक्सपीरियंस जैसे अनुभव होते हैं। यदि किसी तरह से उस समय दिमाग को कंट्रोल किया जा सके तो कुछ हद तक मौत को रोका जा सकता है। इसी प्रयास में अमरीकन केमिकल सोसायटी ने इंसान के आखिरी क्षणों को समझने की कोशिश की है। उसने एक विडियो में बताया है कि व्यक्ति अगर डरावनी फिल्म देखते हुए उसमें खुद को महसूस करते तो हत्यारे द्वारा पीछा किए जाने पर उसका शरीर किस तरह से प्रतिक्रिया करेगा। 

शोधकर्ताओं के अनुसार क्लिनिकल डेथ के बाद भी इंसान का दिमाग संभवत कुछ देर तक जिंदा रहता है। हाल की स्टडीज के मुताबिक शरीर के जैविक रूप से मृत होने से पहले दिमाग की बत्ती एक क्षण के लिए जलती है और शरीर को चेतन कर जाती है। ऐसी धारणा है कि मौत के करीब का अनुभव दिमाग की इसी अंतिम स्थिति के कारण होता है। स्टडीज इस कल्पना को सपोर्ट करती हैं, हालांकि वैज्ञानिक इसको लेकर अभी भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके हैं। 

इन सब के बाद क्या होता है, इसकी कम ही जानकारी है, क्योंकि इंसान लौटकर वापस नहीं आता। यह अपने आप में एक रहस्य ही बना हुआ है और शायद हमेशा बना रहेगा। हालांकि वैज्ञानिक इसकी सत्यता जांचने में अंत तक जुटे रहेंगे।